Posts

A good society!!

Image
वर्तमान समय मैं फेल रही, सभी सामाजिक बुराइयों को लेकर हर कोई परेशान है. सामाजिक बुराई  कुछ इस प्रकार है जैसे:-  दहेज लेना, भ्रष्टाचार, नशा, कन्या भ्रूण हत्या, रिश्वतखोरी आदि- आदि.  उपर्युक्त बुराइयों में से जैसे नशे पर नजर डाले तो समाज मे ईसका बहुत बुरा कुप्रभाव है. आजकल के युवा लोग ईसका बहुत ज्यादा सेवन करते है जिसके उनका वर्तमान तो खराब होता जा ही रहा है साथ मे उनका भविष्य भी, आजकल सेकेण्डरी कक्षा के बच्चे भी तम्बाकू, सिगरेट आदि का नशा बहुत अलग मिज़ाज से करते है जिससे उनके शरीर मे अनेको प्रकार की बिमारियाँ अपना स्थान बना लेती है.  जो की बहुत बुरा कुप्रभाव है समाज मे, दूसरी और नजर डाले तो विशेष तो वर्तमान मे दहेज जैसी कुप्रथा का प्रभाव जोर सोर से है, जो की गरीब या मध्यम वर्ग के लोगों के लिए एक श्राप से कम नहीं है ईसी के चलते प्रत्येक व्यक्ति को बेटी बोझ लगने लगी है, जिसके कारण लोग उनका गर्भपात करवा देते है, और पाप के भागी बनते है. ईन सब बुराई से समाज का स्थर दिन प्रतिदिन गिरता ही  जा रहा है.  ईन समाज मे फेली बुराई को रोकने के लिए राज्य सरकार, केंद्...

5thJuneKabirPrakatDiwas

Image
कबीर परमेश्वर जी ने सच्चे गुरु के लक्षण बताए। सतगुरु के लक्षण कहु, मधुरे बेन विनोद, चार वेद छः सास्त्र, वो कह अट्ठारह बोध।। कबीर साहेब जी ने तत्वज्ञान दिया कि सतगुरु बनाकर भक्ति करना परमावश्यक है। वर्तमान में पूर्ण सतगुरु केवल संत रामपाल जी महाराज ही हैं। उनसे सतभक्ति प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त करें। कबीर परमेश्वर ने बताया कि परमात्मा सभी पापों से मुक्त कर सकता है। आज संत रामपाल जी महाराज ने वेदों से प्रमाणित करके बता दिया कि परमात्मा साधक के घोर पाप को भी समाप्त कर देता है। प्रमाण "यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13"। अधिक जानने के लिए संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन सुनिए।  कबीर परमात्मा ही विश्व को भक्ति दृढ़ाने के लिए सतलोक से सशरीर प्रकट होते हैं सतगुरु रूप बनाकर गरीब, भक्ति मुक्ति ले उतरे, मेटन तीनूं ताप। मोमन के डेरा लिया, कहै कबीरा बाप।। कबीर परमात्मा चारों युगों में प्रकट होते हैं सतयुग में सत सुकृत नाम से, त्रेता में मुनीन्द्र नाम से,  द्वापर में करुणामय नाम से, और कलयुग में अपने असली नाम कबीर नाम से प्रकट होते हैं। ऐसे ही अद्भुत रहस्य जानने के लिए संत रामपा...

DivinePlay Of GodKabir

Image
कबीर परमेश्वर जब नीरू नीमा को बालक रूप में मिले तब उससे पूर्व दोनों जने (पति-पत्नी) मिलकर कपड़ा बुनते थे। 25 दिन बच्चे की चिन्ता में कपड़ा बुनने का कोई कार्य न कर सके। जिस कारण से कुछ कर्ज नीरू को हो गया। फिर कबीर जी ने कहा कि आप चिंतित न हों, आपको प्रतिदिन एक सोने की मोहर (दस ग्राम स्वर्ण) पालने के बिछौने के नीचे मिलेगी। आप अपना कर्ज उतार कर अपना तथा गऊ का खर्च निकाल कर शेष बचे धन को धर्म कर्म में लगाना। उस दिन के पश्चात् दस ग्राम स्वर्ण प्रतिदिन नीरू के घर परमेश्वर कबीर जी की कृपा से मिलने लगा। कसाई का उद्धार गरीब, राम नाम सदने पिया, बकरे के उपदेस। अजामेल से ऊधरे, भगति बंदगी पेस।। एक सदन नाम का कसाई था। संत गरीबदास जी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है, मुक्त नहीं हो पाया, मैं उसको मुक्त करने के लिए कुछ भी लीला कर देता हूँ। ऐसे ही सदन कसाई को शरण में लेकर सतभक्ति कराकर उद्धार किया था। एक बार परमात्मा कबीर साहेब जी जब 5 वर्ष की आयु के थे उस समय उन्होंने 104 वर्ष की आयु के रामानंद जी के साथ ज्ञान चर्चा की, उनके साथ कई लीलाएं की,...

Miracles of God Kabir.

Image
मुर्दे को जीवित करना ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है। ‘‘महर्षि सर्वानन्द की माँ शारदा का रोग ठीक करना" एक सर्वानन्द नाम के महर्षि थे। उसकी आदरणीय माता श्रीमती शारदा देवी पाप कर्म फल से पीडि़त थी। उसने कबीर परमात्मा से उपदेश प्राप्त किया तथा उसी दिन कष्ट मुक्त हो गई।  क्योंकि पवित्र यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 में लिखा है कि ‘‘कविरंघारिरसि‘‘ अर्थात् (कविर्) कबीर (अंघारि) पाप का शत्रु (असि) है। फिर इसी पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में लिखा है कि परमात्मा (एनसः एनसः) अधर्म के अधर्म अर्थात् पापों के भी पाप घोर पाप को भी समाप्त कर देता है। ‘‘कबीर जी द्वारा स्वामी रामानन्द के मन की बात बताना’’ स्वामी रामानंद जी विष्णु जी की काल्पनिक मूर्ति बनाकर मानसिक पूजा करते थे। एक समय ठाकुर की मूर्ति पर माला डालनी भूल गए। तब कबीर परमात्मा जो कि 5 वर्ष के बालक की लीला कर रहे थे बोले कि माला की गांठ खोल कर गले में डाल दो स्वामी जी, पूजा खंडित नहीं होगी...

52 Cruelities On GodKabir

Image
कबीर साहेब सिकंदर लोधी के दरबार में बैठकर सत्संग कर रहे थे तब शेखतकी ने सिपाही से कहा कि लोहे को गर्म करके पिघलाकर पानी की तरह बनाओ और कबीर साहेब पर डालो। ठीक ऐसा ही हुआ जब लोहा गर्म करके पिघलाकर कबीर साहेब पर डाला तब वह फूल बन गए जैसे की मानो फूलों की वर्षा होने लगी। तब सभी ने कबीर साहेब की जय जयकार लगाई। परमात्मा के शरीर में कीले ठोकने का व्यर्थ प्रयत्न" कबीर साहेब को मारने के लिए एक दिन शेखतकी ने सिपाहियों को आदेश दिया की कबीर साहेब को पेड़ से बांधकर शरीर पर बड़ी बड़ी कील ठोक दो। लेकिन जब कील ठोकने चले तो सिपाहियों के हाथ पैर काम करना बंद हो गए और वो वहाँ से भाग गए और शेखतकी को फिर परमात्मा कबीर साहेब के सामने लज्जित होना पड़ा। शेखतकी पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी सभी आश्रमों में झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी 3 दिन का भंडारा करेंगे सभी आना भोजन के बाद एक मोहर, एक दोहर भी देंगे। कबीर साहेब ने 3 दिन का मोहन भंडारा भी करा दिया था और कबीर साहेब की महिमा भी हुई। "मुर्दे को जीवित करने की परीक्षा लेना" दिल्ली के...

MagharLeela Of GodKabir

Image
काशी के ब्राह्मणों ने गलत अफवाह फैला रखी थी कि जो काशी में मरता है स्वर्ग जाता है और जो मगहर में शरीर छोड़ता है वह गधे का जन्म पाता है। कबीर परमेश्वर जी मनमाने लोकवेद का खंडन करने के लिए मगहर में हजारों लोगों के सामने सशरीर गये।.  मगहर में कबीर साहेब ने की अद्भुत लीला! मगहर में कबीर साहेब के सशरीर सतलोक जाने के बाद उनके हिन्दू और मुस्लिम शिष्यों के बीच विवाद हो गया। मगहर के राजा बिजली खाँ पठान और बनारस के राजा बीर सिंह बघेल के बीच कबीर साहेब के अंतिम संस्कार को लेकर बहुत मतभेद हुआ। लेकिन कबीर साहेब के जाने के बाद चादर के नीचे उनके शरीर के बदले केवल फूल मिले। उसके बाद दोनों धर्म के लोगों ने आधे आधे फूल बाँट लिए। कबीर परमात्मा मगहर से सशरीर सतलोक गए थे! जिंदा जोगी जगत् गुरु, मालिक मुरशद पीर। दहूँ दीन झगड़ा मंड्या, पाया नहीं शरीर।। परमात्मा कबीर जी के शरीर को प्राप्त करने के लिए दोनों ही दीन, हिंदू और मुसलमान आपस में झगड़े की तैयारी करके मगहर आए थे लेकिन जब शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल मिले तो दोनों आपस में लिपट लिपट कर रोने लगे। परमात्मा कबीर जी के मगहर से सशरीर जाने के प...

God Kabir!!

Image
कबीर परमात्मा चारों युगों में आते हैं यजुर्वेद के अध्याय नं. 29 के श्लोक नं. 25 (संत रामपाल जी महाराज द्वारा भाषा-भाष्य):- जिस समय पूर्ण परमात्मा प्रकट होता है उस समय सर्व ऋषि व सन्त जन शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण अर्थात् पूजा कर रहे होते हैं। तब अपने तत्वज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं ही कबीर प्रभु ही आता है। प्रमाण :-            🎉ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन। कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्रम् अत्येति रेभन्।। विलक्षण मनुष्य के बच्चे के रूप में प्रकट होकर पूर्ण परमात्मा कविर्देव अपने वास्तविक ज्ञानको अपनी कविर्गिभिः अर्थात् कबीर बाणी द्वारा पुण्यात्मा अनुयाइयों को कवि रूप में कविताओं, लोकोक्तियों के द्वारा वर्णन करता है। वह स्वयं सतपुरुष कबीर ही होता है।